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हरे कृष्ण। जप चर्चा पंढरपुर धाम से, 24 जनवरी 2021

एकादशी श्रवण कीर्तन उत्सव! बहुत सारे भक्त और लीडर्स इसमें सम्मिलित हो रहे है। जपा टॉक के बारे में वह चर्चा करेंगे और उसके बाद वह कीर्तन करेंगे इसमें तीन घटक होंगे जपा टॉक, श्रवण और कीर्तन कोई बस जपा टॉक करेगा, कोई बस कीर्तन करेगा। इसमें 30 मिनट का एक भाग है और यह जितना ज्यादा हो सके उतना चलता रहेगा। हर एक एकादशी को यह चलता रहेगा और उसका उद्घाटन समारंभ आज है। एकादशी श्रवण कीर्तन उत्सव! आप सब समझ रहे हो ना? हम यह जब और जपा टॉप 2 सालों से कर रहे है, हर दिन की ब्रह्म मुहूर्त पर। मैं कभी-कभी इंग्लिश में जपा टॉक देता था और वह हिंदी में ट्रांसलेट हो जाता था। लेकिन मैं बहुत बार हिंदी में ही जपा टॉक देता हूं। लेकिन आज इंग्लिश में दे रहा हूं, ताकि सबको उसका फायदा हो। और अंग्रेजी हमारी इंटरनेशनल भाषा भी है। तो हम अंग्रेजी में बोलेंगे! स्वरूप मंजरी आप इंग्लिश जानती हो ना? ठीक है। तो अब रामलीला का क्या होगा!

उसके लिए भी अंग्रेजी से हिंदी में ट्रांसलेशन चैट सेशन में चल रहा है। तो ने जब जपा टॉक देता हूं तो जागरूक रहिए! श्रवन हमेशा जागरूक रहना चाहिए। जब आप हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।। का श्रवण करते हो, या फिर हरि कथा का श्रवण करते हो तो इन दोनों के लिए आप को जागरूक रेहके उसका श्रवण करना चाहिए! जागरूक होकर श्रवन होना चाहिए। जीव जागो! यह एक जपा टॉक का भाग है। आज मैंने यह निर्धारित किया है कि, जीव जागो जीव जागो वैष्णव भजन पर हम चर्चा करेंगे, उसका कीर्तन करके उसको समझने की कोशिश करेंगे। कृपया सुनिए यह भजन भक्ति विनोद ठाकुर, जो हरिनाम चिंतामणि के लेखक है और वे आदर्श हरिनाम के गवाय्या थे। और यह जीव जागो वैष्णव भजन भी उन्होंने लिखा है। और हमें इस भजन का गुह्य अर्थ समझने की कोशिश करनी चाहिए! यह हमे जागरूक रहकर हरि नाम का जप करने में मदत करेगा। और जीव जागो जैसे भजन का श्रवण करने से कोमल श्रद्धा जरूर दृढ़ श्रद्धा में बदल जाएगी! तो यह भजन क्या कहता है? जीव जागो! इसका अर्थ है कि, सोई हुई आत्माओ उठो! जीव जागो! यहां पर ऐसा नहीं कहा कि, सोए हुए शरीरों उठो! यहां पर कहां है, सोई हुई आत्मा उठो! हरि हरि। हम हाथ में पेन लेकर बैठे है, लेकिन हमारी आत्मा अभी तक सोई हुई है। आत्मा यह है कि, जो भगवान के लिए हमेशा जागरूक रहती है। आत्मा कभी भागती नहीं है। और आत्मा को सुनने के लिए जगे रहने की जरूरत नहीं है। ऐसा कई बार होता है कि, हम हरि कथा में बैठे हुए होते है और हमारा शरीर तो जगह रहता है लेकिन आत्मा सोई हुई ही रहती है। तो भक्तिविनोद ठाकुर ने जो कुछ भी कहा है उसको जागरूक होकर सुनिए, पढ़िए!

जीव जागो, जीव जागो, गौराचांद बोले! भक्तिविनोद ठाकुर कह रहे है कि, गौरचंद्र बोल रहे है गौरचंद्र आपको बुला रहे है! और हमें यह भी समझना चाहिए कि, गौरचंद्र हमें बोल रहे है कि, जीव जागो! जीव जागो! कौन बोल रहे है? ऐसा गौरचंद या गौरांग बोल रहे है।

कोत निद्रा याओ माया-पिशाचीर कोले तो और कितने समय तक आप माया में सोते रहोगे? कृपया जाग जाओ! विशेषतः सब शरीर सोते है जैसे खिलौने सोते है वैसे ही आप सोए हो। आहार, निद्रा, भय और मैथुन यह जानवर और मनुष्य के बीच में सामान्य बातें है। सामान्य बातें है! जैसे हम सोते है, वैसे ही पंछी भी सोते है। हर कोई सोता है। लेकिन अब, तुम आत्मा! तुम्हें इस शरीर के रूप में सबसे अनमोल तोहफा मिला है। तो उत्तिष्ठत जागृत जैसे हमारे शास्त्र कहते है कि, उत्तिष्ठत जाग्रत वरान्निबोधत तो इसीलिए है आत्मा जाग जाओ! और फिर भक्तिविनोद ठाकुर कहते है,

भजिबो बोलिया एसे संसारभितोरे। भुलिया रोहिले सुमि अविद्यार भोरे।।

तुम्हें पता नहीं है? कि कृष्ण और गौरांग को सब कुछ पता है, वे तुम्हारे ऊपर ध्यान रखते है। हर एक जीव पर उनका ध्यान है, यह तुम्हें पता नहीं है? तुम्हें याद नहीं है कि, जब तुम मां के गर्भ में थे और तुम पीड़ा सेह रहे थे और उसी समय तुमने मुझे आग्रह किया था, प्रार्थना कि थी। सभी को पता ही है श्रीमद्भागवत के तीसरे स्कंध में यह चर्चा है। विशेष कर मनुष्य योनि में, जब शिशु गर्भ के अंदर होता है तब वह भगवान से प्रार्थना करता है कि, हे भगवान कृपा करके मुझे यहां से बाहर निकालिए और जैसे ही मैं यहां से बाहर आऊंगा तो मैं क्या करूंगा? मैं आप आपको शरण आऊंगा, मैं आपकी भक्ति करूंगा, मैं आपकी पूजा करूंगा, मैं आपके नाम का कीर्तन करूंगा, मैं हरे कृष्ण महामंत्र का जप करूंगा! मुझे पता है हर युग के अनुसार एक एक धर्म होता है और कलयुग के अनुसार हरि नाम यह धर्म है। और ऐसे ही वह शिशु या आत्मा भगवान से याचना करता है। तो गौरांग हर एक जीव से बोल रहे है कि, तुमने मुझे वचन दिया था कि तुम मेरे नाम का जप करोगे लेकिन यह तो तुम वह भूल गए! भुलिया रोहिले सुमि अविद्यार भोरे।। लेकिन जब तुम्हारा जन्म हुआ मां, ममता और अहंकार ने तुम्हें घेर लिया और अब तुम पूरे तमोगुण में जाकर तुम्हारा जीवन जी रहे हो। तुम विद्यालय में जाते हो, लेकिन वहां के शिक्षक जैसे शंढ और अमर्क असुरों के समर्थक है।

और वे तुम्हें विद्या नहीं अविद्या प्रदान कर रहे है। वह तुम्हें शुद्ध तम गुण का ज्ञान दे रहे है। वे बस तुम्हें स्थूल चीजों का ज्ञान दे रहे है, आत्मा का ज्ञान नहीं दे रहे। और इसके परिणाम वश तुम वह सब भूल गए हो और शुद्ध तमोगुण में चले गए हो। तमसो मा ज्योतिर्गमय! अब में यहां पर तुम्हें उसी का स्मरण दिलाने आया हूं, इस चमक से बाहर निकलो, अंधेरे से प्रकाश में आ जाओ! तुम्हारे दिए हुए वचन को पूरा करो! हरे कृष्ण का जप करो! भगवान यह हर एक जीव से कह रहे है। और हमें समझना चाहिए कि, वह जीव कौन है? वह जीव में हूं! हम सब जीव है। बराबर है ना? और भगवान हमें ही यह समझा रहे है। तो कृपा करके यह बात समझो!

तोमारे लोइते आमि होइनु अवतार। आमि विना बन्धु आर के आछे तोमार?

तो अब आगे भगवान बोल रहे है कि, केवल तुम्हारे लिए मैंने यह अवतार लिया है। गौरांग! गौरांग! गौरांग! यह अवतार बस मैंने तुम्हारे लिए लिया है। मैंने गोलोक का त्याग किया है, वहां के सारे आनंद का त्याग किया है, और मैं इस भौतिक जगत में आया हूं। किस लिए? तोमारे लोइते आमि होइनु अवतार। केवल तुम्हारे लिए! तुम्हें यहां से बाहर निकालने के लिए! और तुम्हारे घर लेकर जाने के लिए। आमि विना बन्धु आर के आछे तोमार? तो सोच लो मेरे अलावा तुम्हारा कोई और दोस्त है? केवल मैं तुम्हारा मित्र हूं। मैंने अर्जुन को कहा था।

भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्र्वरम् | सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति || २९ || (श्रीमद्भगवद्गीता 5.29)

तात्पर्य- मुझे समस्त यज्ञों तथा तपस्याओं का परं भोक्ता, समस्त लोकों तथा देवताओं का परमेश्र्वर एवं समस्त जीवों का उपकारी एवं हितैषी जानकर मेरे भावनामृत से पूर्ण पुरुष भौतिक दुखों से शान्ति लाभ-करता है |

जो मुझे जानते हैं मैं सभी जीवात्माओं का मित्र हूं और मैं तुम्हारी ह्रदय में वास करता हूं। असली मित्र वही है जो जरुरत के समय आपके साथ हो। मैं तुम्हारी मदद के लिए यहां पर हूं। मैं इस बात को साबित करना चाहता हूं कि मैं तुम्हारा असली मित्र हूं। इसलिए तुम जागो और जप करो हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

एनॆछि औषधि माया नाशिबारॊ लागि हरि-नाम महा-मंत्र लओ तुमि मागि

चैतन्य महाप्रभु कह रहे हैं। क्या कह रहे हैं?

जीव जागो जीव जागो गौरचांद बोले

मैं तुम्हारी समस्या जानता हूं और मैं यह भी जानता हूं कि तुम भवरोगी,कामरोगी हो। आप में से कुछ करोना रोगी रह चुके हो। अब आप सोच रहे होंगे कि टीका आ गया है तो चिंता करने की बात नहीं है। परंतु आपको यह बात याद नहीं होगी कि यह शरीर रोग से ग्रस्त होता है। शरीर रूपी मंदिर में रोग एक मूर्ति है। हरि हरि। मेरे पास आपके लिए दवाई है। मैं यह जानता हूं कि आप बीमार हैं। यह दवाई रामबाण उपाय है। रामबाण कभी व्यर्थ नहीं जाता। यह हमेशा लक्ष्य को भेदता है। मेरा इलाज शत प्रतिशत काम करता है। वह इलाज क्या है?

हरि-नाम महामंत्र लओ तुमि मागि

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे यही दवाई है। भगवान जीव को प्रभु नहीं बुलाते हैं क्योंकि वह स्वयं महाप्रभु है।

कुरुक्षेत्र में अर्जुन भगवान को आदेश देते हैं कि वह रथ को युद्ध स्थल के मध्य में ले जाए। अर्जुन प्रभु की भूमिका निभा रहे हैं। हे प्रभु, कृपया करके आप इस दवाई को लीजिए। इस अमृत रूपी दवाई को ग्रहण कीजिए। हरि हरि।

भकति विनोद प्रभु-चरणे पडिया सॆइ हरिनाम मंत्र लोइलो मागिया

श्रील भक्ति विनोद ठाकुर इस गीत का निष्कर्ष निकाल रहे हैं। उन्होंने जीवात्मा और भगवान के बीच की वार्तालाप को सुना है। भगवान ने प्रस्ताव रखा है कृपया करके हरे कृष्ण महामंत्र का जप करे। जैसे ही श्रील भक्ति विनोद ठाकुर ने सुना कि भगवान के पास दवाई है तो उन्होंने कहा मैं यह दवाई लेना चाहता हूं। कृपया मुझे यह दवाई प्रदान कीजिए। मैं आपसे भीख मांगता हूं मैं यह दवाई सबसे पहले अपने पर इस्तेमाल करना चाहता हूं। भकति विनोद प्रभु-चरणे पडिया हे प्रभु मैं आपके चरणो में शरण लेता हूं। सॆइ हरिनाम मंत्र लोइलो मागिया हरिनाम लो हरिनाम लो। जिस विषय में तुम पूछ कह रहे थे तुम्हें सिर्फ हरि का नाम लेना है। मैं इस हरिनाम का सदुपयोग करना चाहता हूं। एक साधारण आत्मा शुद्ध हरिनाम लेने से महात्मा और भक्त बन जाता है। भगवान का नाम लेते समय हमें सचेत रहना चाहिए। यदि आप सचेत नहीं रहोगे तब आप अपराधी कहलाओगे। सभी अपराधों का कारण असावधानी है। हमें ध्यान पूर्वक सुनते हुए जप करना चाहिए। भगवान हम सबको संबोधित करते हुए कह रहे हैं हमें केवल उनको सुनना है। हमने जो भगवान से वादा किया था भगवान वह हमको स्मरण करवा रहे हैं। श्रील प्रभुपाद हमें स्मरण करवा रहे हैं। हमें श्रील प्रभुपाद और पूर्व आचार्यों को सुनना चाहिए। श्रील भक्ति विनोद ठाकुर, श्ठ गोस्वामी, भगवान गौरांग के पार्षद क्या करते हैं? कीर्तनिय सदा हरि यही कार्य करते हैं। 6 वर्षों तक गौरांग ने पूरे भारतवर्ष यात्रा की।

राधा भाव गौरांग प्रकट हुए। उन्होंने भगवान के नाम का गुणगान किया, नृत्य किया पूरे भारत में। उस समय वह कहते थे जीव जागो जीव जागो। डरो मत मेरे निकट आओ। उन्होंने शेर और जंगली जानवरों को हरिनाम पर नृत्य कराया। यदि जंगली जानवर हरिनाम का जप और नृत्य कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं कर सकते? हम सभी को जप करना चाहिए हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हमें तुलसी माला पर जप करना चाहिए और कम से कम 16 माला करनी चाहिए। एकादशी पर ज्यादा जप करना चाहिए। यह एक तरीका है। दूसरा तरीका है कीर्तन महाप्रभु कीर्तन नृत्य गीत वादित्र माद्यान मनसो रसेन। संगीत उपकरण जैसे मृदंगा, करताल, हम जप करते हैं और नाचते है। जप स्वयं के लिए होता है। परोपकार घर से आरम्भ होता है। जप इतना जोर से होना चाहिए कि हम स्वयं उसको सुन सके। हम जप करते हुए कीर्तन या नगर कीर्तन भी कर सकते हैं।

भगवान हमसे प्रसन्न होते हैं जब हम कीर्तन करते हैं। इसका हजारों गुना लाभ पहुंचता है। एकादशी श्रवण कीर्तन उत्सव में मैंने आपके साथ जप करा और फिर जपा टॉप हुआ। अब हम 20 मिनट के लिए कीर्तन करेंगे। हरे कृष्ण!

English

24 January 2021

Remember the promise you made to the Lord

Hare Krishna dear chanters of the holy name. We did Japa for about half an hour. ISKCON Kirtan Ministry wishes to conduct such a program on every Ekadasi. It is called the Ekadasi Sravanam Kirtanam Utsava. Many devotees and leaders will participate in chanting Japa with you, delivering a Japa talk and then they will do kirtana with you. Many of them will do all three items - Japa, talk and kirtana. Some will do just Japa, some will do Japa and Japa talk, and some will just do kirtana. It's up to them. We have 30 minutes slots. This will go on as long as possible on Ekadasis.

We are inaugurating this Ekadasi Sravanam Kirtanam Utsava today on this Putrada Ekadasi day. I have been doing this Japa and Japa talk for 2 years now during the early morning hours. I was doing the talk in English and sometimes it was translated into Hindi. Then I was mostly speaking in Hindi only. Somehow ISKCON’s international language has become English. I wish it could be Sanskrit. We will be talking in English today. Those who do not understand English can follow the Hindi translation in the chat. Be attentive as I talk. The hearing has to be attentive.....

Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare

Bothe Hari katha and Harinama have to be heard attentively - attentive chanting, attentive hearing. Jiv Jago! As part of this Japa Talk I have decided to share a song jīv jāgo, jīv jāgo, gauracānda bole. We will not sing the song. We will try to understand the song so please listen. Bhaktivinoda Thakur who is the compiler of Harinama Cintamani was an ideal chanter. He has sung and compiled this song, Jiv Jago. If we can understand the deeper meaning of his song, it will further help and convince us about attentive chanting. Our komal sraddha will become driid sraddha.

Jiv Jago Jiv Jago. Jiv Jago means wake up sleeping souls. The very word has significance. It doesn't say wake up sleeping bodies, it says wake up sleeping souls. The soul keeps on sleeping. We get up from the bed. We open our eyes, but still the soul could remain sleepy. The soul is not paying attention to the Lord. The soul is not running for sringar darshan in the temple. The soul is not hearing or saying that I want to hear some Harikatha or some Harinama. It happens often that the body wakes up and the soul is still sleeping, in complete darkness. Listen carefully to what Bhaktivinoda Thakura is singing and writing, jīv jāgo, jīv jāgo, gauracānda bole. Bhaktivinoda Thakura is saying that gauracānda is calling, gauracānda bole. Gauracānda is calling, addressing jīv jāgo, jīv jāgo. Who is saying this? Gauracānd is saying - wake up sleeping souls.

jīv jāgo, jīv jāgo, gauracānda bole kota nidrā jāo māyā-piśācīra kole.

Translation Lord Gauranga is calling, "Wake up, sleeping souls! Wake up, sleeping souls! How long will you sleep in the lap of the witch called Maya.[Jiv Jago Jiv Jago Verse 1]

Bhaktivinoda Thakura is saying that gauracānda is calling, gauracānda bole. Gauracānda is calling, saying jīv jāgo, jīv jāgo. Oh, sleeping soul, wakeup...

kota nidrā jāo māyā-piśācīra kole

Wakeup or else you will be sleeping in the lap of a witch, Maya. Please get up especially when the body is sleeping. It means that dogs also sleep, everybody sleeps - eating, sleeping, mating, and defending.

āhāra-nidrā-bhaya-maithunaṃ cha samānam_etat_pashubhir_narāṇām | dharmo hi teṣhāmadhiko visheṣho dharmeṇa hīnāḥ pashubhiḥ samānāḥ

Translation Eating, Sleep, Fear and Sex; these habits are common between human beings and animals. It is Dharma which is the special quality of human beings. Without the Dharma, they are similar to the animals. [Hitopadesh Verse 0.25]

Eating, sleeping, mating, and defending are common amongst animals as well as human beings. Animals also sleep, birds also sleep, and everyone sleeps. But now you, the soul, you are in a human body. You have received such a rare gift.

uttiṣṭhata jāgrata prāpya varānnibodhata kṣurasya dhārā niśitā duratyayā durgaṁ pathastatkavayo vadanti

Translation Arise, awake; having reached the great, learn; the edge of a razor is sharp and impassable; that path, the intelligent say, is hard to go by.[Upanishad Verse 1.3.14]

Wake up and try to understand the boon you have received in this human form of life. Soul, Atma, atmanam wake up once and for all. Stay up day and night. The song continues …

bhajibo boliyā ese saḿsāra-bhitare bhuliyā rohile tumi avidyāra bhare

Translation You have forgotten the way of devotional service and are lost in the world of birth and death.[[Jiv Jago Jiv Jago Verse 2]

Gauranga knows, Krsna knows. The Lord is addressing jiv jago. The Lord is addressing a living entity - don’t you remember when you were in the womb of your mother and you were suffering. At that time you had approached Me and you were praying. This we know from Srimad Bhagavatam, Kapiladev is giving us the knowledge in the third canto. The living entity, especially in this human form is crying in the womb and praying for help. It promises that if You get me come out of here, I will worship You, bhajibo boliyā, I will surrender unto You, I will chant Your glories, I will chant...

Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare

You had promised to do whatever it took according to the age and dharma, Satya Yuga, Treta Yuga, Dwapara Yuga, Kaliyuga, or the Hare Krishna Yuga. The Lord is talking to the living entity. Gauranga is talking to the living entity that you have promised Me that you will worship Me, you will chant My names and glories, see what has happened to you. A promise is a promise. Gentlemen do this. It's a gentleman's promise, but bhuliyā rohile tumi avidyāra bhare. All this could not happen as soon as you took birth. Mummy and Mamta and aham have taken over and now you have become engrossed in mundane activities. You have become ignorant. You were sent to school, but the teachers are the followers of Shand and Amarkha. Instead of teaching you vidya, they are teaching you avidya. They filled you with ignorance and taught you only matter, forgetting the spirit. As a result, you are full of ignorance. Hence to remind you, to get out of this ignorance Lord Gauranga is saying get up sleeping souls, come to the light. Keep your promise. Chant Hare Krsna. The Lord is talking to the living entities, and by hearing this we have to understand that the Lord is talking to us. Each one of us is a living entity. The Lord is addressing us. Listen attentively.

tomāre loite āmi hoinu avatāra āmi binā bandhu āra ke āche tomāra

Translation: I have descended just to save you; other than Myself you have no friend in this world.[ Jiv Jago Jiv Jago Verse 3]

The Lord is kindly saying, just for your sake I have taken this avatara. I have appeared in the form of Gauranga just for you.

golokam ca parityajya lokanam trana-karanat kalau gauranga-rupena lila-lavanya-vigrahah

Translation: In the Kali-yuga, I will leave Goloka and to save the people of the world, I will become the handsome and playful Lord Gauranga. (Markandeya Purana)

The Lord is saying I have left Goloka and come here to take you back home back to Godhead. He is saying, consider Me as your friend. I have told Arjuna:

bhoktaram yajna-tapasam sarva-loka-mahesvaram suhrdam sarva-bhutanam jnatva mam santim rcchati

Translation: The sages, knowing Me as the ultimate purpose of all sacrifices and austerities, the Supreme Lord of all planets and demigods and the benefactor and well-wisher of all living entities, attain peace from the pangs of material miseries. [ BG 5.28]v

I am the friend of all the living entities, I am here in your heart next to you. I am your friend. A friend in need is a friend indeed. I know you need help. I am here to help you. I am proving to you, I am your real friend. Please get up, please wake up, and chant

Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare

enechi auṣadhi māyā nāśibāro lāgi' hari-nāma mahā-mantra lao tumi māgi'

Translation: I have brought the medicine that will wipe out the disease of illusion from which you are suffering. Take this maha-mantra-Hare Krsna, Hare Krsna, Krsna Krsna, Hare Hare/Hare Rama, Hare Rama Rama Rama, Hare Hare." [ Jiv Jago Jiv Jago Verse 4]

Lord Gauranga is saying, I know you are bhava rogi and Kama rogi and I know some of you are Corona rogi and you think you have a vaccination now. You don't know that the body is given to you and the nature of the body is to be diseased. The deity of sickness is installed in the body. I have medicine for you, and this medicine is Rama Vana upaya. It never goes in vain. It must hit the target. This for sure is the cure. I have come with the cure. And what is the cure...

hari-nāma mahā-mantra lao tumi māgi

Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare

This is the medicine. He is Mahaprabhu. But then ...

ahaṁ bhakta-parādhīno

Sometimes the Lord also takes the stand and devotees become Prabhu for Him.

senayor ubhayor madhye ratham sthapaya me 'cyuta

Arjuna is saying, “Acyuta, bring my chariot forward in between the two armies". Arjuna has become Prabhu of sarthi Krsna. He could say Prabhu to a living entity. The Lord is saying, “Prabhu, take this medicine, drink this.”

bhakativinoda prabhu-caraṇe pariyā sei hari-nāma-mantra loilo māgiyā

Translation Srila Bhaktivinoda Thakura says: "I fall at the Lord's feet, having taken this mahā-mantra."

Bhaktivinoda Thakura is concluding the song and saying, "Oh Lord, you have the medicine. I need this. I beg you. Oh Lord, I fall at Your feet, I am asking for that name that You talked about". Please give that holy name. I want to nourish myself with that holy name. I want to become a mahatma. I want to become a pure devotee. I want to do suddah harinama. Unless that is done we are not going to become a mahatma.

aparadha-sunya hoye loha krishna-nama

Be attentive while chanting the holy name of the Lord. If you are not attentive then you are going to be offensive. Inattention is the cause of all the offences. Let us always chant and the Lord is addressing each of us. Just listen to Him, He is reminding us of our promise. Each one of us promised to Lord...

bhajibo boliyā ese saḿsāra-bhitare bhuliyā rohile tumi avidyāra bhare

ISKCON Founder Acarya has spoken and written on behalf of Lord Gauranga. Let us listen to Srila Prabhupada, our previous Acaryas, Srila Bhaktivinoda Thakur and the six Goswamis. What are they doing? Kirtana sada hari. Gauranga travelled for 6 years.

Lord Gauranga appeared in Radha bhava and chanted and danced all over India. At that time He also sang jiva jago. Come here, I am here, don't fear. He even easily managed to wake up the tigers. Of course, He didn't wake up the tiger's body, but He woke up the soul. They were chanting and dancing. If animals can chant and dance, why not human beings. Always chant...

Hare Kṛṣṇa Hare Kṛṣṇa Kṛṣṇa Kṛṣṇa Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare

Chanting is done in two ways. We chant on our Japa beads a minimum of 16 rounds. Some chant more every day and some chant more on Ekadasi so that's one way. Another way is to do kirtana....

mahaprabhoh kirtana-nritya-gita vaditra-madyan-manaso rasena

We take instruments, mrdanga and karatals. We chant and dance. While the Japa is for ourselves, charity begins at home. We chant for ourselves. We chant loud enough just so that we could hear. But when we do kirtana, Nagar sankirtana there is mrdanga, karatals and dance. That is for us as well as for others around us. The Lord is very pleased as we perform kirtana, Nagar sankirtana also means congregational chanting. We congregate in big numbers then we chant, dance, and then there will be a thousand more benefits.

As part of Ekadasi Sravanam Kirtana Utsava I did some Japa, a Japa talk and now I would love to do Kirtana for 20 minutes or so before the next presenter takes over. Stay tuned and join us for kirtana….

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