Hindi

आज मैं मेरे गाँव अरावड़े में हूँ। मेरे भाई रामदास तथा उनका परिवार हमारे साथ जप कर रहे हैं। इस प्रकार मैं इस सम्पूर्ण विश्व के प्रत्येक कोने में भक्तों तक पहुँच सकता हूँ। अरावड़े में हमारा इस्कॉन मन्दिर भी हैं तथा मेरे भाई - भाभियाँ, मेरे मित्र , मेरे शिष्य बन रहे हैं। अब वे भी इस कांफ्रेंस का लाभ उठा रहे हैं। मैं उन सभी को तथा आपको जप करते हुए देखकर अत्यंत प्रसन्न होता हूँ। आप भी परिवार के सदस्यों , रिश्तेदारों तथा मित्रों को इस कांफ्रेंस में सम्मिलित करने का प्रयास कीजिए। आप यह सुनिश्चित कीजिए कि कम से कम भारत में वे अपना जप सुबह के समय पूरा कर रहे हैं। सुबह के समय हरे कृष्ण का जप करना यही सबसे उत्तम करणीय कार्य हैं। हमारी प्रवृत्ति यह रहती हैं कि हम सुबह से ही सांसारिक कार्यों में व्यस्त होते है तथा दिन भर उसीमे उलझे हुए रहते हैं। अतः आप ऐसा मत कीजिए। हमारा सर्व प्रथम कार्य हरे कृष्ण महामन्त्र का जप करना हैं। आप जप प्रारम्भ करने से पहले मंगल आरती , तुलसी आरती कर सकते हैं। मेरा मानना हैं कि इस कांफ्रेंस के माध्यम से हम एक स्थान पर बैठकर , जिसे हमने अपनी प्राथमिकता बनाया हैं तथा अन्य सभी कार्य अतिरिक्त कार्यों में आते हैं। जब मैं बोल रहा हूँ तब आप जप मत करो। कई भक्तों की यह आदत होती हैं कि वे प्रवचन सुनते समय भी जप करते हैं इससे न तो हम ध्यान पूर्वक श्रवण कर पाते हैं तथा न ही सावधानीपूर्वक जप ही कर पाते हैं , अतः यह भी एक प्रकार का विक्षेप ही हैं। आप प्रतिदिन सुबह के समय एक निश्चित समय पर इस कांफ्रेंस में सम्मिलित होने के लिए लगभग एक घण्टे तक एक स्थान पर बैठते हैं , इस समय आहार , निद्रा , भय तथा मैथुन कोई भी हमें परेशान नहीं करता हैं। आप केवल जगे हुए रहकर जप करते हैं। आप यहाँ न तो भोजन करते हैं और न ही सोते हैं। कम से कम आप बिस्तर से बाहर होते हैं। आप हो सकता हैं कि बैठे हुए झपकी ले रहे हो , परन्तु न करने से वह भी अच्छा हैं। मैं देखता हूँ कि आप में से अधिकतर भक्त पूर्ण रूप से जगे हुए तथा जप करते हैं। हरे कृष्ण हरे कृष्ण का जप करने का अर्थ हैं कि आप प्रजल्प नहीं कर रहे हैं। आप इसके अलावा अन्य कोई भी कार्य नहीं कर रहे हैं। अतः जैसे ही आप जप करने के लिए बैठते हैं यह सुनिश्चित कीजिए कि आप उचित ढंग से जप कर रहे हैं। आप जप के साथ साथ अन्य कोई अवांछनीय कार्य नहीं करें। आप यहाँ हरेर नाम इव केवलम (चैतन्य चरितामृत आदि लीला 17. २१) करते हैं। जप एक कार्य हैं इसके अलावा कई अन्य कार्य भी हैं। इस जगत में करने के लिए कई क्रियायें हैं। परन्तु आप वे सब नहीं करते हैं। जैसे ही आप जप करना प्रारम्भ करते हैं उसका अर्थ हैं अब आप केवल - हरेर नाम इव केवलम कर रहे हैं। कृष्ण को प्रसन्न करने के उद्देश्य से सदैव जप करते रहिए। यदि इस जगत में सबसे उत्कृष्ट कोई करणीय कार्य हैं तो वह हैं - हरे कृष्ण का जप। जैसे ही आप हरे कृष्ण का जप करते हैं , भगवान जप करने वाले साधक से अत्यन्त प्रसन्न होते हैं। जैसा कि मैंने पहले भी आपको कहा हैं कि जब मैं आपको जप करते हुए देखता हूँ तो मुझे अत्यंत प्रसन्नता होती हैं। क्या आप जब अन्य भक्तों को जप करते हुए देखते हैं तो आपको प्रसन्नता नहीं होती ? इस कांफ्रेंस के माध्यम से हम एक दूसरे को जप करने के लिए प्रेरित करते हैं तथा हमारा अन्तिम उद्देश्य हमारे जप की गुणवत्ता को सुधारना हैं। जब हम - बोधयन्तः परस्परम (भगवद गीता १०.९) अर्थात एक दूसरे को प्रेरित करके हम और अधिक प्रसन्न होते हैं। जब हम देखते हैं कि कोई अन्य भक्त श्रवण , कीर्तन , पाद सेवनं , अर्चनम , वन्दनम आदि नवदा भक्ति के अंगों का पालन कर रहा हैं तो हमें प्रसन्नता होती हैं। इसके साथ ही साथ जब हम यह देखते हैं कि भक्त अनेक प्रकार की सेवाओं में संलग्न हैं तब हमें प्रसन्नता का अनुभव होना चाहिए। जब मैं आपको जप करते हुए देखता हूँ तो मुझे प्रसन्नता होती हैं। इसीप्रकार मुझे जप करते हुए देखकर आपको प्रसन्नता हो सकती हैं। क्या आप मुझे जप करते हुए देखकर प्रसन्न होते हैं ? भक्त मुझे तथा कई बार आप सभी को दण्डवत प्रणाम कहते हैं। जब आप किसी को दण्डवत प्रणाम करते हैं तो इसका अर्थ हैं आप उससे प्रसन्न हैं। बच्चे भी जप कर रहे हैं। उन्हें जप करते हुए देखना अत्यंत हर्ष का विषय हैं क्योंकि वे खेलना छोड़कर जप कर रहे हैं।जैसा कि नारद मुनी बताते हैं कि जब वे बालक थे तब उनका खेलों के प्रति आकर्षण नहीं था अपितु वे ब्राह्मणों , भक्तिवेदान्तों की सेवा में संलग्न रहते। उसी प्रकार जब हम हमारे इस्कॉन के बालकों को जप करते हुए देखते हैं तो अत्यंत हर्ष होता हैं। जब मैं आपको जप करते हुए देखता हूँ तो मैं प्रसन्न होता हूँ। मैं आप सभी के लिए प्रार्थना भी करता हूँ। आप भी मेरे लिए प्रार्थना कीजिए जिससे हम निरन्तर जप करते रहें तथा गौरांग , कृष्ण , राधा - श्यामसुन्दर , राधा माधव , जगन्नाथ , सीता राम या जो भी आपके इष्टदेव हैं उनका स्मरण कर सकें, परन्तु हम गौड़ीय वैष्णवों के आराध्य देव राधा - कृष्ण हैं। यह मन्त्र जो हम गौड़ीय वैष्णव जपते हैं वह हैं - हरे कृष्ण महामन्त्र। यह मन्त्र हैं तथा इस मन्त्र के देवता राधा - कृष्ण हैं। हम अपने आराध्य राधा कृष्ण की सेवा इस हरे कृष्ण महामन्त्र के जप द्वारा करते हैं। देवाम देवयजो यान्तिम (भगवद्गीता ७.२३) देवताओं को भजने वाले उनके लोक में जाते हैं , भूतों को भेजने वाले उनके लोकों में जाते हैं , पितरों को भेजने वाले पितृलोक में जाते हैं , परन्तु जो , यान्ति मद्याजीनोपि माम (भगवद गीता ९. २५) , मुझे भजते हैं वे मेरे परम धाम , गोलोक ऐव नाम्नी निज धाम्नी (ब्रह्म संहिता ५.३७) , को प्राप्त होते हैं। तब जहाँ राधा कृष्ण नित्य निवास करते हैं वही हमारा लक्ष्य हो जाता हैं, और उनकी सेवा का भाव हैं - यज्ञै संकीर्तनयी प्रायः (श्रीमद भागवतम ११.५.३२) तब हमारा गन्तव्य गोलोक धाम हो जाता हैं तथा हम पुनः भगवद्धाम जा सकते हैं, जिसके विषय में श्रील प्रभुपाद अधिकतर बताते थे। अब तक आप विश्व की सबसे बड़ी भगवद गीता के विषय में तो जानते होंगे। यह इटली में बनाई गई हैं। वहां से इसे दिल्ली लाया गया। भारत के प्रधानमन्त्री कल शाम को ४.३० बजे इसका लोकार्पण करेंगे। मैं भी उस कार्यक्रम में सम्मिलित होने जा रहा हूँ। अतः आप सभी से किसी अन्य दिन पुनः भेंट होगी। हरे कृष्ण .....

English

I am all the way back, in Aravade , which used to be my home. My brother Ramdas and his family is chanting with us. Like that I am able to reach out to devotees and disciples in every nook and corners of the world. We have a temple now in Aravade and my brothers and sisters in law and my friends have become my disciples. Now they are also taking advantage of this conference. I am happy to see them and to see you all chanting. You could also get your near and dear ones to chant. Make sure they all are chanting in the early morning hours, at least in India. This is the best thing to do. To chant Hare Krishna in the early morning hours. The tendency is we keep planning about different household affairs and other affairs and then we keep running around. So don't do that. First business is to chant Hare Krishna. You could also do mangala aarti and this and that, Tulsi prayers and then chant Hare Krishna. I think because of this conference, leaving aside all other business , sitting down and chanting is becoming a priority. Don't chant while I am talking. Some have that habit, but in that you cannot hear properly as we as cannot focus on chanting, so that is also distraction. You are coming , sitting down and chanting at a fixed hour in early morning hours. No eating , sleeping, mating and defending is happening. You are only chanting. You are staying awake. Here you are not eating, not sleeping. At least you are not in the bed. You may be sitting and nodding. That is also good. Most of you are fully awake and chanting. Chanting Hare Krishna Hare Krishna means you are not doing prajalpa. You are not doing anything else. So like that, as soon as you sit down to chant, chant perfectly. You are not doing so many other undesirable activities. You stay away from prajalpa or sleeping because you are sitting and chanting Hare Krishna. You are doing harer nama eva kevalam. (C.C. Adi 17.21) Chanting is one of the activities and there are so many more. There are so many activities, words and kriyas in the world? But you are not doing that. As soon as you start chanting, means you are doing only harer naam eva kevalam. Keep Chanting, with the aim of making Krsna happy. The best thing you can do is to chant Hare Krishna. As soon as you are chanting, the Lord is pleased with you, the chanter. I have said this several times when I also see you chanting , I feel happy. When you see others chanting doesn't that make you happy? Through this conference we inspire each other to chant and also our goal is to chant better. As we do - bodhayantaha parasparam ( BG. 10.9) inspiring each other , we become more happy. As we see other devotees doing sravanam, kirtanam pada sevanam ,arcanam, vandanam Nava-vidha Bhakti, we become Happy. When we see other devotees engaged in so many varieties of different devotional activities and services, that should make us happy. As I see you chanting, I become happy. You may also become happy seeing me chanting. Are you happy seeing me chanting? Devotees are offering dandavats to me and many times to you also. When you are offering dandavats to someone it means you are happy with him. Children are also chanting. So nice to see kids chanting instead of all the playing business. As Narada Muni said, he was not interested in playing when he was a child, but he was serving mahatmas , Bhaktivedantas. Like that many of our ISKCON children, when we see them chanting, it's very pleasing. When I see you chanting , I am pleased. I also begin praying for you. You may pray for me, so that we continue to chant, while remembering our dear lord - Gauranga, Krsna, Radha-Syamsundar, Radha-Madhava or Jagannatha, or Sita-Ram depending upon your istadev or aradhya dev. But basically our Gaudiya Vaisnavas aradhya dev is Radha-Krsna. The mantra that the Gaudiya Vaisnavas , we are chanting is Hare Krishna Hare Krishna. That's the mantra and mantra- devata is Radha-Krsna. Radha Krishna becomes our worshipable Lord. We worship our worshipable Lord Radha Krsna by the chanting of Hare Krishna .devaan devayajo yanti ( BG. 7.23) demigods worshippers go to abode of demigods and those who worship ghosts go there. Those who worship forefathers go to their planet, pitru loka. But those who worship me - yanti madyajinopi mam (BG. 9.25) they come to my planet where I eternally reside - Goloka Eva namni nijdhamni ( BS. 5.37). Then that becomes our final destination, where Radha Krsna eternally reside. The mode of worship is - yajne sankirtnaihi prayaha.( SB. 11.5.32) Then our destination becomes Goloka. Back to Godhead. That Srila Prabhupad has always talked about. By now you must be aware of the huge Bhagvad-Gita on the planet. It has been made in Italy. It was transported to New Delhi. Prime Minister of India will be unveiling that tomorrow at 4.30 pm. I am also attending that function. So see you another day . Hare Krishna !

Russian

Джапа сессия 25.02.2019 Я в пути назад, в Аравад, который раньше был моим домом. Мой брат Рамдас и его семья воспевают вместе с нами. Таким образом, я могу общаться с преданными и учениками в каждом уголке мира. У нас сейчас есть храм в Араваде, мои законные братья и сестры, мои друзья стали моими учениками. Теперь они также пользуются этой конференцией. Я рад видеть их, и видеть как вы все воспеваете. Вы также можете попросить своих близких и родных воспевать. Убедитесь, что они все воспевают в ранние утренние часы, по крайней мере, в Индии. Лучшее, что можно делать, это воспевать Харе Кришна рано утром. Тенденция такова, что вначале мы планируем различные домашние дела и другие дела, а затем мы бегаем по кругу. Не делайте этого. Первейшая обязанность - повторять Харе Кришна. Вы также можете проводить мангала-арати, молитвы Туласи, а затем повторять Харе Кришна. Я думаю из-за этой конференции, становится приоритетом сидеть и воспевать оставив в стороне все другие дела. Не повторяйте, пока я говорю. У некоторых есть такая привычка, но вы не можете внимательно слушать,так же как мы не можем сосредоточиться на воспевании, поскольку это также отвлекает. Вы приходите, садитесь и воспеваете в определенное время, рано утром. Никакой еды, сна, совокупления и обороны. Вы только повторяете. Вы пробуждаетесь. Здесь вы не едите, не спите. По крайней мере, вы не в кровати. Вы можете сидеть и кивать. Это тоже хорошо. Большинство из вас полностью бодрствуют и воспевают. Воспевание Харе Кришна Харе Кришна означает, что вы не совершаете праджалпу. Вы не делаете ничего другого, только садитесь и повторяете, повторяете внимательно. Вы не совершаете многие другие нежелательные действия. Вы держитесь подальше от праджалпы или сна, потому что вы сидите и повторяете Харе Кришна. Вы совершаете харер намаива кевалам (Ч.Ч Ади 17.21) Воспевание является одним из видов деятельности, и есть много других. Как много в мире занятий, слов и kriyas? Но вы этого не делаете. Как только вы начинаете воспевать, вы совершаете только харер нама эва кевалам. Продолжайте повторять с целью сделать Кришну счастливым. Лучшее, что вы можете сделать, это повторять Харе Кришна. Когда вы повторяете, Господь доволен вами, воспевающими. Я говорил это несколько раз, когда я вижу как вы воспеваете, я чувствую себя счастливым. Когда вы видите, как другие повторяют, разве это не делает вас счастливыми? Благодаря этой конференции мы вдохновляем друг друга на воспевание, и наша цель - воспевать лучше. Когда мы это делаем -бодхайантах параспарам (BG. 10.9), вдохновляя друг друга, мы становимся более счастливыми. Когда мы видим, как другие преданные совершают шраванам, киртанам пада севанам, арчанам, ванданам нава-видха бхакти, мы становимся счастливыми. Когда мы видим, что другие преданные занимаются различными видами преданной деятельности и служения, это должно нас радовать. Когда я вижу, как вы воспеваете, я становлюсь счастливым. Вы также можете стать счастливыми, увидев, что я воспеваю. Вы счастливы видеть меня воспевающим? Преданные предлагают мне дандаваты и вам также, много раз. Когда вы предлагаете дандаваты кому-то, это означает, что вы счастливы с ним. Дети тоже воспевают. Так приятно видеть, что дети воспевают вместо того что бы играть в игры. Как сказал Нарада Муни, он не интересовался играми, когда был ребенком, но он служил махатмам- бхактиведантам. Как и многие из наших детей в ИСККОН. Когда мы видим, что они воспевают, это очень приятно. Когда я вижу, как вы повторяете, мне приятно. Я начинаю молиться за вас. Вы можете молиться за меня, чтобы мы продолжали воспевать, вспоминая нашего дорогого Господа - Гаурангу, Кришну, Радха-Шьямсундар, Радха-Мадхаву или Джаганнатху, или Сита-Раму, в зависимости от вашего иштадева или арадхйи-дева. Но в основном наш Гаудия-вайшнавский арадхйа-дев это Радха-Кришна. Мантра Гаудия-Вайшнавов, которую мы повторяем, это Харе Кришна Харе Кришна. Это мантра, а мантра-девата - это Радха-Кришна. Радха Кришна становится нашим почитаемым Господом. Мы поклоняемся нашему почитаемому Господу Радхе Кришне, воспевая Харе Кришна. деван дева-йаджо йанти (БГ 7.23). Те, кто поклоняется полубогам, родятся среди полубогов; поклоняющиеся предкам отправятся к предкам; те, кто поклоняется духам и привидениям, окажутся в этих формах жизни; те же, кто поклоняется Мне - йанти мад-йаджино ’пи мам (БГ. 9.25), будут жить со Мной. Они приходят на мою планету, где я живу вечно, - голока ева нивасатй(БС. 5.37). Тогда это становится нашей конечной целью, где Радха Кришна живут вечно. Способ поклонения - yajnaihsankirtana-prayair (ШБ11.5.32) Тогда нашим пунктом назначения становится Голока. Вернуться к Богу. Об этом Шрила Прабхупада говорил всегда. Вы должно быть уже слышать про самую большую Бхагавад-Гиту на планете. Она была сделана в Италии. Она была доставлена в Нью-Дели. Премьер-министр Индии откроет ее завтра в 16.30. Я также посещаю это мероприятие. Так что увидимся в другой день. Харе Кришна!