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*हरे कृष्ण* *जप चर्चा-२०/०६/२०२२* *परम पूज्य लोकनाथ स्वामी महाराज* *सुंदर ते ध्यान उभे विटेवरी* *कर कटावरी ठेवोनिया* *सुंदर ते ध्यान उभे विटेवरी* *तुळसीहार गळा कासे पितांबर* *आवडे निरंतर हेची ध्यान* *सुंदर ते ध्यान उभे विटेवरी* * *मकर कुंडले तळपती श्रवणी* *कंठी कौस्तुभ मणी विराजित* *सुंदर ते ध्यान उभे विटेवरी* *तुका म्हणे माझे हेची सर्व सुख* *पाहीन श्रीमुख आवडीने* *सुंदर ते ध्यान उभे विटेवरी* *सुंदर ते ध्यान उभे विटेवरी* पंढरपुर धाम की जय। पंढरपुर की और मै बढ़ रहा हु इसीलिए यह अभंग याद आया कहा भी मैंने । आप सुने या नहीं। आप ही नहीं यहाँ कई सारे सुनने वाले बैठे है। हम लोग कहते रहते है फ़ूड फॉर थॉट। सुविचार। जो सु विचार है। सु विचार है तो कु विचार भी है ही। कु विचार से हमें लेना देना नहीं है। हमारा लेना देना सु विचारो से है। *हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे* मुझे कहना तो है सिंपल लीविंग हायर थिंकिंग हमारा मतलब तो संस्कृत भाषा से है जिस भाषा में उच्च विचार कहे है लिखे है। हरी हरी। मै कहते रहता हु उच्च विचार मतलब भगवान् के विचार या भगवान् से सम्बंधित विचार। माया से सम्बंधित कु विचार। भगवान् के विचार उच्च विचार है और मुझे यह भी कहना है यह विचार लोग जानते ही नहीं भगवान् कौन है ? कृष्ण के विचार भगवान को जानना और मानना। हमको भगवान् का नाम ही पता नहीं है और काम भी पता नहीं है। सूर्यनारायण की जय। क्या कहे और क्या नहीं कहे। वेदैश्च सर्वे अहम् मेद वेद्यो - वेद को जानना वाला भी मै हु। वेदज्ञ भगवान है। वेद के रचयिता भगवान है। वेद को जानना है। भगवान को जानना है। भगवान ने जो भी कहा है इस वेद में यह पूरा ज्ञान है भगवान् के समबन्ध में। जो कुछ जानना चाहते है हम वह सब वेद में है यह संस्कृत भाषा में है। संस्कृत सभी भाषा की जननी यह संस्कृत हमें शुद्ध बनती है हमारा चेतो दर्पण मार्जनम कराती है। वेद को सुन कर पढ़ कर अध्यन करके हम सुसंकृत हो जाते है। एक होता है धर्म दूसरी होती है संस्कृति। संस्कृत भाषा देव बोलते है यह आचार्यो की भाषा है। भगवान् कई सारि भाषा बोल सकते है। वेद की भाषा को सुन कर हम सुशिक्षित भी होंगे और सुसंकृत भी होंगे। आज कल बेकार पढ़ाया जाता है पाठशाला में। लोग एडुकेटेड हो जाते है लेकिन उनको विद्वान नहीं कहा जा सकता। आज कल सैकड़ो डिग्री है। हायर एजुकेशन के लिए लोग विदेश जाते है। सच में हायर एजुकेशन होता है क्या ? हम तो कहेंगे यह लोअर एजुकेशन है लोग इससे नीच विचार के बन जाते है। सुसंस्कृत नहीं बनाते लोग इससे। क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए यह भी नहीं जानते। ऐसे लोग सुशिक्षित नहीं होते। आज कल लिखा तो होता है विद्यालय लेकिन विद्या क्या है ? राज विद्या राज गुह्यं पवित्रम उत्तम क्या आप जानते हो उत्तम शब्द का मतलब ? उत्तम मतलब रजो, तमो गुण से परे *तमसो माँ ज्योतिर गमया* ज्योति मतलब कृष्ण की और जाओ। कलियुग में दोष ही दोष है। विद्यालय जहा लिखा है वह क्या करना चाहिए अविद्या लिखना चाहिए। उनके आईडिया नहीं है विद्या किसको कहते है। आत्मा से संबधित है जो वह है विद्या। तुम मनुष्य बने हो इसिलए क्या करो ब्रह्म जिज्ञासा करो। चेतना के सम्बन्ध में जानो स्टडी करो और इसको समझो। चेतना चेतनानं, नित्यो नित्यानं। कई सारे नित्य है प्रमुख है भगवान्। वे एक भगवान् और हम कई सरे है। हम अंश है। वे सनातन है। जो आता है वह जाता भी है जिसका जन्म है उसका मृत्यु भी है। कलियुग में कई सरे धर्म है। *हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे* यह धर्म शासवत है। कृष्ण का नाम चैतन्य को जागृत करता है। समजना चाहिए जगाने की बात कर रहे है। मै हु इसका सबूत क्या है ? मै सोचता हु इसीलिए मै हु यदि मै नहीं सोचता तो मै नहीं होता। पशु में आत्मा नहीं है ऐसा सब कहते है इसीलिए काटो खाओ मारो। बिल्ली दूध चोर है वह जाती है दूध के कटोरे के पास और आँख बंद कर के बैठती है और जब मालकिन जाती है तो बिल्ली दूध पीती है। यह सारि योनिओ में आत्मा है। वस्त्र अलग अलग पहने है एल्कीन वे भी आत्मा है। सारे विचार वेद वाणी है। यह वाणी अपौरुषेय है। यह वाणी संसार के किसी पुरुष की वाणी नहीं है यह वाणी गोविन्द आदि पुरुष की है। श्रील प्रभुपाद हमें समझते है यह वाणी अपौरुषेय है। यह वाणी शाश्वत है। सत्य ऐसा ही शाश्वत होता है। सत्यमेव जयते। अर्जुन ने कहा जो भी कह रहे हो आप वह सत्य है मुझे मंजूर है स्वीकार है। सत्य की जीत होती है झूट की नही। मुझे यह भी कहना था की भगवान ही सृस्टि करते है ब्रह्मा भी कर लेते है कुछ मदत। प्रलय में शिव जी मदत करते है। संसार की सृस्टि होती है फिर प्रलय भी होता है। भू मतलब होना। भूत्वा भूत्वा प्रलीयता। वेद की वाणी शाश्त्रो की वाणी यह सब सृष्टि के पहले से है होते है और बाद में भी बने रहते है। प्रलय तो भगवान् का हुआ। सृस्टि से परे है यह वेद की वाणी। वेद सुनके समझे जाते है। पहले के लोग श्रुति धर्म के होते थे। सुन के समाज लेते थे। कलियुग आता है तो लिखने की आवश्यकता होती है। कलियुग के हम मंद लोग है ऐसे लोगो के लिए लिखने की प्रक्रिया होती है। लिखी हुयी बात शाश्वत होती है। माया से कोई मुग्धा लोग है उन्हें गया ही नहीं होता वे कौन है। जो जिव माया में मुग्ध है उनके कल्याण के लिए वेदांत कृत्या है। वाणी शाश्वत है। यह केवल हिन्दू की बात नहीं है यह ज्ञान हर जिव के लिए है हर जिव किनका है भगवान् का है। कलियुग में कई सरे धर्म है। यह धर्म अपना पराया सिखाता है। हिन्दू मुस्लिम लड़ते है। हमारा धर्म कैसा है ? देवकी कुटुम्बकम।

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