Monthly Archives: January 2019

/Lets Chant Together/

Srila Prabhupada once said in 1969: “We are spreading this Krsna consciousness movement because there is a great need of this consciousness throughout the world. And the process is very easy — that is the advantage.”

In December while on a travelling preaching tour, HH Lokanath Swami Maharaja thought of a way in which Maharaja would be able to chant with devotees and lovers of the Holy Name from all around the world. This gave birth to the ‘Let’s Chant Together’ sessions.

They last for about an hour, roughly from 6am to 7am IST. The session includes chanting followed by instructions, realisations and answering of questions.

We welcome you to come and join us daily and take advantage of this amazing association If you wish to be notified daily, kindly join our what’sapp group, through this link:

https://chat.whatsapp.com/FnTgnzd8N9jA80ztkPX4ho

Current Month

January 31, 2019
lets Chant Together 31st January

मुझे लगता हैं की आप मेरी विनती पर अपने और अधिक गुरु भाई और गुरु बहनों को तथा अन्य व्यक्तियों को भी इस कांफ्रेंस में सम्मिलित करने का प्रयास कर रहे होंगे। यह कांफ्रेंस सभी के लिए हैं। आपके प्रयासों से इस कांफ्रेंस में प्रतिभागियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही हैं। आज २८१ भक्त इसमें सम्मिलित हुए। हमने दक्षिण अफ्रीका में ८ भक्तों से इस कांफ्रेंस की शुरुवात की थी , अतः ८ से २८० बहुत बड़ी संख्या और उपलब्धि हैं। कृष्णभक्त प्रभु ने अनुमान लगाया कि इस कांफ्रेंस में कल लगभग ४५० से ५०० भक्त सम्मिलित थे। क्योंकि अलग अलग मंदिरों से भक्त एक साथ बैठकर जप करते हैं। मैं इस कांफ्रेंस में नए भक्त सम्मिलित होते हुए देखता हूँ। भारतीय पदयात्रा से २५ भक्त हमारे साथ इस समय जप कर रहे हैं। जिस प्रकार हम मंदिरों में सेवित श्री विग्रह की प्रसन्नता के लिए पुस्तक वितरण का स्कोर बताते हैं , उसी प्रकार श्री गुरु और गौरांग तथा आप सभी की प्रसन्नता के लिए में बताना चाहूंगा कि आज हमारे साथ २८० भक्त इस कांफ्रेंस में सम्मिलित हुए हैं।

अब हम जप के विषय में चर्चा करेंगे अतः आप सभी इसमें (कांफ्रेंस में) बने रहिये और इसे छोड़िएगा मत। हम प्रतिदिन आपको प्रेरित करने के लिए, कुछ चर्चा करते हैं। प्रत्येक दिन हम किसी नए विचार के बारे में चर्चा करते हैं कि किस प्रकार हम दिन प्रतिदिन जप करते रहें। आज हमारे पास कम समय हैं क्योंकि मुझे श्रीमद भागवतम की कक्षा देने जाना हैं। मैं अभी कोल्हापुर में हूँ।

कल हमने यहाँ पर अद्भुत रथयात्रा उत्सव मनाया था। कल हमने चर्चा की थी कि किस प्रकार हम इस जप के लिए पहले से तैयारी कर सकते हैं अतः कल की जगन्नाथ रथ यात्रा मेरे लिए और कोल्हापुर के अन्य भक्तों के लिए तैयारी थी।

चैतन्य महाप्रभु भी कोल्हापुर पधारे थे, और उन्होंने यहाँ पर नृत्य भी किया था। वे महालक्ष्मी मंदिर में दर्शन करने के लिए भी गए थे। महालक्ष्मी सीधा वैकुण्ठ से यहाँ अवतरित हुई थी। जब हमारी रथयात्रा उधर से निकल रही थी तो हमारा रथ महालक्ष्मी मंदिर के पश्चिमी द्वार के सामने रुक गया और हमने वहां कीर्तन किया। अतः आज कीर्तन करते हुए मुझे चैतन्य महाप्रभु का स्मरण हो रहा था क्योंकि उन्होंने भी यहीं कीर्तन किया था। कल जब मैं जगन्नाथ के रथ से प्रसाद वितरण कर रहा था तो मुझे कुछ आभास हुआ। वहां प्रसाद की बहुत अधिक मांग थी , और मैं प्रसाद वितरण करके और अधिक आनन्दित हो रहा था। जगन्नाथ अपने प्रसाद के लिए जाने जाते हैं , जिस मात्रा में उन्हें भोग लगता हैं , वे उससे अत्यंत प्रसन्न होते हैं। ” जगन्नाथ का भात , जगत पसारे हाथ ” अर्थात जगन्नाथ का प्रसाद प्राप्त करने के लिए हर कोई आगे आता हैं। कल मैंने अनुभव किया कि हर कोई जगन्नाथ प्रसाद प्राप्त करने के लिए आगे आकर मांग रहा था । मैंने महसूस किया कि यह प्रसाद स्वयं जगन्नाथ हैं अतः मैं सभी को स्वयं जगन्नाथ दे रहा था। मैं उनकी कृष्णभावनामृत को जाग्रत करने के लिए मात्र एक साधन था। मुझे लगा कि मैं इस प्रकार कृष्ण भावनामृत आंदोलन का प्रचार और प्रसार कर रहा हूँ। कई भक्त और हमें भी प्रसाद और कीर्तन बहुत अच्छे लगे , यही हमारी तैयारी हैं।

आज सुबह जब मैं जप करने के लिए बैठा तो वे अनुभव मेरे मस्तिष्क में तरोताज़ा थे। मैं कोल्हापुर में चैतन्य महाप्रभु की उपस्थिति , कीर्तन और नृत्य की कल्पना कर रहा था। वे विचार मेरे मस्तिष्क में चल रहे थे जब मैं जप कर रहा था।

मैं आपकी टिप्पणियों के लिए आप सभी को धन्यवाद् देता हूँ। आप मुझे अपने अनुभव और प्रश्न ‘लोक – संग ‘ ग्रुप के माध्यम से भेज सकते हैं। आप में से अधिकतर भक्त लोग संग ग्रुप में हैं।

श्याम मंजरी माताजी (मॉरिशियस) : अब जब मैं आप सभी के साथ इस कांफ्रेंस में जप करती हूँ तो मुझे लगता हैं की समय भगवान कृष्ण के हाथ में हैं।

गुरु महाराज : मुझे लगता हैं कि मेरा समय अनुकूल हैं। वह अपने समय का सर्वोच्च उपयोग कर रही हैं। जब आप श्री कृष्ण के शरणागत हो जाते हैं तो समय आपका सबसे घनिष्ठ मित्र बन जाता हैं। विशेष रूप से जब हम जप करते हैं तो हम समय का सदुपयोग करते हैं। हमें वर्तमान में स्थित होना चाहिए अर्थात हमारा ध्यान जप पर होना चाहिए। समय ही कृष्ण हैं। यह समय का सबसे उत्तम उपयोग हैं। यह समय वैसे ही व्यर्थ नहीं हो रहा हैं, आप भगवान् कृष्ण के साथ रहने या उनका अनुभव करने का प्रयास कर रहे हैं।

श्रीमद भागवतम में आता हैं – ” आयुर हरती वयं पुंशा : ” (श्रीमद भागवतम २.३. १७) प्रत्येक सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ आयु घट रही हैं । उन सभी व्यक्तियों ने अपना समय व्यर्थ में बर्बाद किया हैं। केवल उन्हीं व्यक्तियों ने इसका सही उपयोग किया हैं जो , ” उत्तम श्लोक वर्त्तवह :” (श्रीमद भागवतम २. ३. १७) अर्थात जो उत्तम श्लोक – श्री कृष्ण के सम्बन्ध में वार्ता करते हैं। अन्य सभी के लिए एक और दिन, एक और सप्ताह , १ और महीना , १ और वर्ष , १ और जीवन व्यर्थ ही चला जाता हैं – ” श्रम एव ही केवलम ” (1.२. ८). इसलिए समय का सबसे उत्तम सदुपयोग ‘ हरे कृष्ण ‘ का जप हैं जिससे हम जब तक जप करते हैं भगवान् का संग करते हैं।

मदन मोहन मोहिनी माताजी : मैं (गुरुदेव) इस कांफ्रेंस में जप के माध्यम से अपने आध्यात्मिक बच्चों का ध्यान रख रहा हूँ। आप सभी मेरे आध्यात्मिक पुत्र और पुत्रियां हो।

माधवी सीता (न्यू – जर्सी) : मैं इस सत्र में जब से यह शुरू हुआ हैं तब से सम्मिलित हो रही हूँ। मैं जितनी भी अन्य आध्यात्मिक सेवाएं करती हूँ उनमे यह सबसे उत्तम हैं। मैं जप सत्र के दौरान होने वाले प्रवचन को ध्यान से सुनती हूँ और प्रत्येक दिन उसे पढ़कर उसपर चिंतन करती हूँ।

वह हम सभी का धन्यवाद कर रही हैं कि हमने उन्हें प्रेरित किया। इसलिए निरंतर जप करते रहिये। इस नाम को चारों ओर फैला दीजिये। जितने अधिक भक्त होंगे उतना ही दृढ संग मिलेगा। यह कांफ्रेंस, गृहस्थ भक्तों के लिए जो मन्दिर से दूर रहते हैं , अत्यंत उपयोगी हैं। भक्तों के सँग के बिना कृष्ण – भावनामृत में बने रहना अत्यंत कठिन हैं। यदि कोई ऐसा सोचता हैं, ” मैं भक्तों के संग के बिना कृष्ण भावनामृत में प्रगति कर सकता हूँ। ” श्रील प्रभुपाद इसे माया कहते हैं , क्योंकि कलियुग में यह संभव नहीं हैं। हम सभी को भक्तों के सँग की आवश्यकता हैं। और इस कांफ्रेंस के माध्यम से हम उन्हें यह संग प्रदान करते हैं जो नियमित रूप से मन्दिर नहीं जा पाते हैं।

मुझे विश्वास हैं कि आप लोग नियमित रूप से साप्ताहिक कार्यक्रम में मन्दिर जाते होंगे। अतः यहाँ पर आप सभी को नियमित रूप से प्रतिदिन भक्तों का संग मिल रहा हैं। कुछ लोग कहते हैं कि मैं नियमित रूप से मन्दिर जाता हूँ, प्रत्येक वर्ष जन्माष्टमी पर। मुझे पूरा भरोसा हैं किं आप लोग ऐसा नहीं करते होंगे। हम इस जप सत्र को प्रत्येक दिन करने की पूरी कोशिश करते हैं। अतः यहाँ पर आप इस सत्र में नियमित रूप से सम्मिलित हो सकते हैं , मासिक या साप्तहिक नहीं अपितु व्यवहारिक रूप से प्रत्येक दिन।

January 30, 2019
lets Chant Together 30th January

आज भारतीय पदयात्रा के भक्त भी हमारे साथ जप कर रहे हैं। हम उनका स्वागत करते हैं। आचार्य प्रभु इस पदयात्रा का प्रबंधन कर रहे हैं। वे गौरांग और हरिनाम की सेवा में इंटरनेट और तकनीक की भी सहायता ले रहे हैं। भारतीय पदयात्रा से मेरे अत्यंत प्रिय गुरु भाई अखिलधर प्रभु भी आज इस कांफ्रेंस में हमारे साथ हैं। तथा मेरे वरिष्ठ गुरु भाई भक्तरूप प्रभु भी इस कांफ्रेंस में सम्मिलित हुए हैं। हम उनका स्वागत करते हैं और आभार प्रकट करते हैं। कल हमने इस जप चर्चा के अंग्रेजी में होने के कारण मेरी चिन्ता के विषय में चर्चा की थी क्योंकी कई भक्त इसे समझ नहीं पा रहे थे। परन्तु एक अच्छी खबर हैं कि एक भक्त , अकिंचन भक्त प्रभु , आगे आये और वो इस कक्षा का हिंदी में अनुवाद करेंगे। अतः इस समस्या का निवारण हो गया। यह हरिनाम ‘ वाँछा कल्पतरु …. ‘(वैष्णव प्रणाम मन्त्र ) हैं।

हरिनाम हमारी इच्छाओं की पूर्ति करता हैं। अकिंचन भक्त प्रभु भी ‘ वांछा कल्पतरु ‘ हैं , वे कल्पतरु वृक्ष के समान हमारी इच्छायें पूरी करते हैं। अब आप इस जप चर्चा को हिन्दी भाषा में भी पढ़ सकते हैं। कौन्तेय प्रभु और उनकी ” जीव जागो ” पार्टी के प्रयास से कल मॉरिशियस से ५२ भक्तों ने इस कॉन्फ्रेंस में भाग लिया। वे आत्मा को तृप्त करने के लिए उसमे जल दे रहे हैं, अर्थात अधिक से अधिक जीवों को इस कांफ्रेंस तक ला रहे हैं। शुरुवात में हो सकता हैं कि उन्हें कुछ कठिनाई हो परन्तु जब वे हमारे साथ इस कांफ्रेंस में जप करते हैं तो वे अवश्य ही प्रसन्न होंगे , क्योंकि ऐसा कई भक्तों का अनुभव हैं।

इस कांफ्रेंस में सम्मिलित होने के लिए आपको प्रयास करना चाहिए , चाहे आप कसी भी स्थिति में क्यों न हो।

कल की कुछ टिप्पणियाँ इस प्रकार हैं। आप में से बहुत से भक्तों की टिप्पणियाँ इस जप सत्र को ‘ जप में क्रान्ति ‘कहकर सम्बोधित कर रही हैं , मैं आशा करता हूँ कि यह जप में क्रान्ति लाए। २० – ३० वर्षों पहले जब महाभारत प्रोग्राम आता था तो उसने सम्पूर्ण विश्व में एक प्रकार की क्रान्ति को जन्म दिया था, और विशेषकर भारत में।

जब भी उस कार्यक्रम के शुरू होने का समय होता , लोग अपना सारा काम छोड़कर टेलेविज़न देखने लग जाते। कभी कभी रेलगाड़ी के ड्राईवर , गाड़ी को किसी समीप के स्थान में रोककर , रेल छोड़कर टेलेविज़न पर यह कार्यक्रम देखने चले जाते थे, क्योंकि उस समय स्मार्ट फ़ोन नहीं थे। यात्रीगण तब तक सोचते रहते थे कि रेल क्यों रूक गई जब तक कि उन्हें यह पता नहीं चल जाता कि ड्राइवर टेलेविज़न पर महाभारत कार्यक्रम देखने चला गया था। अतः हमें भी जप में उस प्रकार की क्रान्ति लानी चाहिए। हमें जप के समय केवल जप ही करना चाहिए , अन्य कार्य आप या तो जप से पहले करें या बाद में।

मनमोहिनी माताजी लिखती हैं कि इस जप सत्र के कारण उनकी दिनचर्या बदल गई हैं और उसमें सुधार भी आया हैं। मेरे अनुमान से यह और भी कई भक्तों का अनुभव होगा , क्योंकि इस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आपको भक्तों और अपने आध्यात्मिक गुरु का सँग प्राप्त होता हैं। जब आपके जप में सुधार होता हैं तो आपकी चेतना भी विकसित होती हैं, आप उच्च – विचारक बनते हैं , आप और अधिक दृढ होते हैं ,आपका विश्वास भी और अधिक दृढ होता हैं , और इस प्रकार क्रमशः आपके उस दिन की जीवनशैली में भी सुधार आता हैं। इस प्रकार अगले दिन का जप और अधिक गुणवत्ता युक्त बनता हैं। जब जप में सुधार आता हैं तो कृष्ण – भावनामृत की सम्पूर्ण जीवन शैली भी उन्नत होती हैं।
कल मैं तमाल कृष्ण गोस्वामी महाराज की एक वार्ता सुन रहा था। जिसमें वे भागवतम कक्षा के श्रवण के विषय में चर्चा कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि इस्कॉन में समस्या यह हैं कि भागवतम कक्षा के लिए केवल वक्ता ही तैयारी करके आता हैं , वो पहले से अध्ययन करता हैं, कक्षा में श्लोकों के प्रस्तुति की योजना बनता हैं , परन्तु विद्यार्थी या श्रोतागण तैयारी के साथ नहीं आते हैं। उन्हें भी भागवतम सुनने के लिए तैयारी के साथ आना चाहिए। जिस प्रकार पाठशाला में शिक्षक उस दिन जिस विषय के बारे में पढ़ाना हैं वो पढ़कर आता हैं और विद्यार्थी पिछले दिन जो पढ़ाया गया था उसको पुनः घर से पढ़कर आते हैं। उन्हें घर पर कल जो पढ़ाया गया था उसको पुनः दोहराना चाहिए। अतः मैं सोच रहा था कि जब हम जप करते हैं तो हमें भी इसके लिए तैयारी करनी चाहिए, और ऐसा नहीं हो कि केवल मैं ही तैयारी के साथ भाग लेता रहूँ , आपको भी इसके लिए तैयार रहना चाहिए। हम सुबह उठकर मंगल आरती करते हैं। इसलिए मंगल आरती भी जप के लिए तैयारी हैं, या हम शिक्षाष्टकं पढ़ते हैं , या आपको हरिनाम के प्रति दस अपराधों के बारे में सुनाया जाता हैं। इस प्रकार हम जप के लिए तैयार होते हैं। कुछ मंदिरों में भक्त श्री हरिनाम चिंतामणी से या श्री नामामृत से जप करने से पहले कुछ पढ़ते हैं , कुछ भक्त स्वयं नामाचार्य श्रील हरिदास ठाकुर से उनकी कृपा दृष्टि के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रार्थना करते हैं , अतः ये उनमेंसे कुछ तैयारियाँ हैं। मैं सोच रहा था कि आप पिछले दिन में क्या करते हैं ये भी एक तैयारी ही हैं। आपने कल जो भी कुछ अच्छा या बुरा किया हो वह आपको आज अवश्य ही प्रभावित करेगा। वह आपको आज के जप में ध्यान लगाने तथा उसमें विक्षेप पैदा होने से बचाएगा, इस प्रकार वह भी एक तैयारी हैं कि हम आज किस प्रकार कार्य करते हैं।

साधना का अर्थ केवल जप ही नहीं हैं अपितु हम जो भी अन्य आध्यात्मिक कार्य करते हैं जैसे श्रवण , श्रील प्रभुपाद की पुस्तकें पढ़ना ,कृष्ण पुस्तक तथा श्री चैतन्य चरितामृत का पठन , वो भी इसका एक भाग हैं। अतः जब आप आज सुबह जप करते हैं तो आपको भगवान के नाम , रूप , गुण तथा लीलाओं के विषय में अवश्य ही विचार करना चाहिए। आपने कल जिस भी आध्यात्मिक ग्रन्थ का पठन किया था उसके सम्बन्ध में सोचना चाहिए, या आपने जिस विग्रह के दर्शन किये या उनके चलचित्र के दर्शन किये हो तो उसपर अपना ध्यान टिकाना चाहिए। जिसप्रकार यदि आप भगवान राम या श्री चैतन्य महाप्रभु की कोई तस्वीर ध्यान से देखते हैं और उसके पश्चात अपने नेत्र बंद करते हैं तो वही तस्वीर आपके मन में पुनः उभर कर आ जाती हैं। आप स्वाभाविक रूप से उसका स्मरण करते हैं। अतः आप क्या पढ़ते हैं , क्या देखते हैं , क्या स्पर्श या सूँघते हैं ये सभी आपके जप के लिए तैयारी हैं , यदि आप अच्छा गुणवत्ता युक्त और ध्यान केंद्रित करके प्रार्थना करते हुए जप करना चाहते हैं।

ये सभी जप किस प्रकार हो उसके लिए कुछ विशेषण हैं। यह इस पर भी निर्भर करता हैं कि आपने पिछली रात्री में क्या किया था। यदि आपने पर्याप्त नींद नहीं ली या आप बहूत अधिक सोये हैं, तब भी आपके जप में विक्षेप आएगा। अधिक निन्द्रा, अधिक अज्ञान का कारण हैं। अतः आपने रात्रि किस प्रकार व्यतीत की , यह भी अपनी तैयारी का एक हिस्सा हैं। आपने रात्री भोजन में क्या प्रसाद पाया था , और आपने बीते दिन जो भी कार्यकलाप किये वे सभी आपके आज के जप में भागीदार होते हैं। अतः कुछ भी करने से पहले आपको सोचना चाहिए , ” क्या यह मेरे जप में सहायता करेगा , क्या इससे मेरा जप और अधिक गुणवत्ता युक्त होगा या इससे मेरे जप में विक्षेप पैदा होगा। ” आपको समायोजन करते हुए एक उत्कृष्ट जीवन शैली को स्वीकार करना होगा। जो भी अनुकूल हैं उसे हम स्वीकार करते हैं , “अनुकुलस्य संकल्पः प्रतिकुलस्य वर्जनम ” (हरी भक्ति विलास ११. ४१७ ) , जो कुछ भी प्रतिकूल हैं या हमारे जप में उपयोगी नहीं हैं उसका परित्याग करना चाहिए।

आज परम पूज्य रूप रघुनाथ महाराज भी हमें संग दे रहे हैं और हमारे साथ आज जप भी कर रहे हैं। जब भी मैं आपको जप करते हुए देखता हूँ तो आपकी समृद्धि और कृष्ण भावनामृत में आपकी उन्नति के लिए प्रार्थना करता हूँ। मैं हमेशा आप सभी के लिए भगवान से प्रार्थना करता हूँ। आप अन्यों को भी इस क्रान्तिकारी कॉन्फ्रेंस के बारे में बताइए जिससे वे भी इसमें भाग ले सकें। उन्हें इसमें सम्मिलित होने के लिए प्रोत्साहित कीजिये। हमनें ज़ूम में ५०० प्रतिभागियों के सम्मिलित होने जितनी क्षमता का विस्तार किया हैं। अतः इसमें अभी भी स्थान रिक्त हैं।

हरे कृष्ण
हरिनाम प्रभु की जय….

January 29, 2019
lets Chant Together 29th January
January 28, 2019
lets Chant Together 28th January

आज किसी का जन्मदिन है हम उन्हें ‘जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हैं I और उन्हें यह सुझाव देते हैं कि वे हरीनाम जप को निरन्तर करते रहें और सदैव प्रसन्न रहें। जब हम किसी को ” हैप्पी बर्थडे ” कहते हैं तो हमें उन्हें बताना चाहिए कि वास्तव में प्रसन्न (हैप्पी ) कैसे रहा जाता है। इस्कॉन में हम यह गाते हैं ” आप पुनः कभी जन्म न लें ” अर्थात यह जन्म आपका अन्तिम जन्म हो और इसके पश्चात आप पुनः भगवद्धाम जाएँ। यह उन सभी के लिए भी हैं जो जप करते हैं। जो कोई भी जप करता है वह पुनः जन्म नहीं लेता। यह सन्देश आप सभी के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं कि आप पुनः जन्म नहीं लेंगे। यह विचार मुझे यह कांफ्रेंस करने में अत्यंत आनन्द देता हैं, जब मैं आप सभी को जप करते हुए देखता हूँ। यह मेरे आँखों और कानों के लिए उत्सव के समान हैं। और मेरी अँगुलियों के लिए उत्सव है – जब मैं अपनी तुलसी जप माला को स्पर्श करता हूँ। मैं एक अत्यन्त निम्न भक्त हूँ , केवल भगवान का एक छोटा सा प्रतिनिधी। यदि इससे मुझे इतनी प्रसन्नता हो रही हैं तो परम भगवान इससे कितने प्रसन्न होंगे। हम भगवान की प्रसन्नता और आनन्द का आँकलन भी नहीं कर सकते हैं। अतः जप करने से केवल जप करने वाला व्यक्ति ही प्रसन्न नहीं होता अपितु उसे देखने वाले विशेष रूप से भगवान स्वयँ अत्यन्त प्रसन्न होते हैं। इसलिए आप और भगवान दोनों प्रसन्न होते हैं। इस प्रकार भगवान आपके कारण प्रसन्न होते हैं। ऐसा कोई अवरोध नहीं हैं जो हमें भगवान से दूर रख सके। यदि भगवान आपसे प्रसन्न हैं तो आपको और क्या चाहिए। तब हम पुनः अपने घर (भगवद्धाम ) चले जाएँगे और सदैव प्रसन्न रहेंगे। इसलिए सदैव जप करते रहिये , परन्तु जप ध्यानपूर्वक करना चाहिए , ह्रदय से जप करना चाहिए , और जप प्रार्थनापूर्वक होना चाहिए , जो इतना आसान नहीं हैं। जब हम एक साथ जप करते हैं और हम अधिक सचेत रहते हैं। हमारी भावना यह होनी चाहिए , ” हे भगवान! आप कहाँ हैं ? आप कहाँ हैं ? ”

कुछ समय पहले जप मैं जप कर रहा था , मैं सोच रहा था , ” हे भगवान ! आप कहाँ हैं ? आप कहाँ हैं ? ” और तभी स्क्रीन के ऊपर राधा – गोपाल जी की फोटो प्रकट हुई , जिसे किसीने पोस्ट किया था। इस प्रकार जप करते समय आश्चर्यजनक घटनाएँ हो सकती हैं।

आप सभी इस कांफ्रेंस में सम्मिलित होने के लिए बहुत विशेष प्रयास कर रहे हैं – जैसे सुबह जल्दी उठना , बिस्तर छोड़ना , अन्य कार्यों को विलम्बित करना आदि। इसके लिए बहुत प्रयास और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है।और जब आप बैठकर जप करते हैं तो उसमे और अधिक प्रयास की आवश्यकता होती हैं ,ताकि हमारा जप, शुद्ध , सावधानीपूर्वक , तथा प्रेम से हो सके। इसके लिए और अधिक प्रयास की आवश्यकता हैं, जैसे मन , बुद्धि , ह्रदय तथा अन्त में आत्मा को इसमें लगाना। आत्मा की भागीदारी यह है , हम समझें ” मैं आत्मा हूँ। ” कांफ्रेंस में केवल शरीर की उपस्थिति ही पर्याप्त नहीं हैं, अपितु जब शारीरिक रूप से हम उपस्थित रहते हैं तो और भी कई अन्य कार्य करने होते हैं जैसे हमें सभी तरह से संरेखित रहना होगा जिससे हम श्रवण और स्मरण पर ध्यान दे सकें, उसी प्रकार जिस प्रकार एक वाहन के पहिये संरेखण में होते हैं। यद्यपि पहिये खेंचते और धकेलते हैं परन्तु सबसे महत्वपूर्ण हैं कि वे संरेखण में रहे। यदि आप अपने वाहन को गेराज से लेकर आयें और उनमे एक पहिया एक दिशा में जा रहा हो और दूसरा वाला दूसरी दिशा में , या एक पहिया जाम हो गया हो तो वह वाहन आगे नहीं बढ़ सकता , उसकी गति रुक जाएगी। इस हालत में यह वाहन खाई में गिर जाएगा। इसी प्रकार हमारा शरीर , मन , इन्द्रियाँ , बुद्धि , को हरिनाम के रूप में भगवान पर संलग्न होना चाहिए। हरिनाम भगवान के रूप और लीलाओं से अभिन्न हैं। हरीनाम एक प्रवेश द्वार की तरह है जिसके माध्यम से हम प्रवेश करते हैं, और फिर हम पूरी आध्यात्मिक दुनिया को देखते हैं। हम उस दुनिया का एक हिस्सा बन जाते हैं। हम चारों ओर देखते हैं और भगवान के रूप, गुण, लीलाओं और भक्तों, जैसे नन्द बाबा , यशोदा मैया , गोपियाँ , तथा रूपानुग भक्तों , के दर्शन करते हैं। हमें रूपानुग भक्तों के भक्ति भाव को समझने और उन्हें साधने का प्रयास करना चाहिए।

शत्रुघ्न प्रभु : दण्डवत प्रणाम गुरु महाराज , प्रतिदिन दर्शन देने के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।

गुरु महाराज : केवल देखना ही दर्शन नहीं हैं। सुनना भी दर्शन होता हैं। हमारा अन्तिम उद्देश्य परम भगवान के दर्शन करना I

January 27, 2019
lets Chant Together 27th January
January 26, 2019
lets Chant Together 26th January
January 25, 2019
lets Chant Together 25th January
January 24, 2019
lets Chant Together 24th January
January 23, 2019
lets Chant Together 23rd January
January 22, 2019
lets Chant Together 22nd January
January 21, 2019
lets Chant Together 21st January
January 20, 2019
lets Chant Together 20th January
January 19, 2019
lets Chant Together 19th January
January 18, 2019
lets Chant Together 18th January
January 17, 2019
lets Chant Together 17th January
January 16, 2019
lets Chant Together 16th January
January 15, 2019
Makar-Sankranti 15th January
January 14, 2019
lets Chant Together 14th January
January 12, 2019
lets Chant Together 12th January
January 11, 2019
lets Chant Together 11th January
January 10, 2019
lets Chant Together 10th January
January 9, 2019
lets Chant Together 9th January
January 8, 2019
lets Chant Together 8th January
January 7, 2019
lets Chant Together 7th January
January 4, 2019
lets Chant Together 4th January
January 2, 2019
lets Chant Together 2nd January

Visitor Counter

007084
Today : 29
Yesterday : 111
This Month : 1253
This Year : 7084
Total Users : 7084
Who's Online : 1
X