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16 अगस्त 2019 हरे कृष्ण हरे कृष्ण, यह आपके जप करने का समय है यह नियमित जप करने का समय नहीं है, क्योंकि भारत में यह जप करने का समय नहीं है। अमेरिका में उस समय प्रातः काल था उस समय वहां के भक्त जप कर सकते थे परंतु भारत में शाम का समय था आप प्रत्येक समय जप कर सकते हैं। चैतन्य महाप्रभु कहते हैं (नामनामकारी बहूधा निजसर्वशक्ति) इस प्रकार से चैतन्य महाप्रभु बता रहे हैं कि जप के लिए कोई कठोर नियम नहीं है जप कभी भी किया जा सकता है। मैं अभी अलाचवा (न्यू रमणरेती ) में हूँ जहां पर हमारा अमेरिका में कृष्ण बलराम मंदिर है। मैं इस कांफ्रेंस में आप सभी के साथ जप करते हुए और यहां मेरे आस-पास जो भक्त बैठे हैं मैं उनसे भी चर्चा कर रहा हूं। इस प्रकार जो विशेष बात है यहां पर वह यही है कि जप के लिए हमारे कोई कठोर नियम नहीं है, जप इसी समय होना चाहिए यह इसके नियम हैं परंतु फिर भी हम आप सभी को ब्रह्म मुहूर्त में जप करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और आपको उसके लिए सुझाव देते हैं कि ब्रह्म मुहूर्त में अपना जप करें। इस प्रकार से यद्यपि जप के लिए कोई कठोर नियम नहीं है फिर भी हम आप सभी को यह सुझाव देते हैं कि आप सभी अपना जप ब्रह्म मुहूर्त में पूरा करें क्योंकि ब्रह्म मुहूर्त के समय सतोगुण का प्रभाव होता है। उसी प्रकार से दोपहर के समय रजोगुण का प्रभाव अधिक होता है रात्रि में तमोगुण का प्रभाव होता है इस प्रकार से इन गुणों के अनुसार हमारा दिन है। यह तीन भागों में विभक्त होता है और इसके लिए आपको प्रयास करना चाहिए। यहां पर जप के लिए कौन सा गुण किस प्रकार प्रभावित करता है उसके अनुसार आपको प्रयास करना चाहिए कि ब्रह्म मुहूर्त में हम अपना जप पूरा करें। इस प्रयास में सबसे प्रथम चीज तो यही है कि आपको सुबह जल्दी उठना पड़ता है, आप जल्दी उठिए आप ब्रह्म मुहूर्त में अपना जप करने का प्रयास कीजिए मैं जानता हूं कि आप सभी अत्यंत व्यस्त हैं। आपकी दिनचर्या अत्यंत व्यस्त रहती है फिर भी आप अपने जप करने का समय निश्चित कीजिए आप यह समझ ले कि मेरे लिए जो दिन है वह 24 घंटे का नहीं है अपितु 22 घंटे का ही है। 22 घंटों में आप अपनी जो अध्यात्मिक सेवाएं हैं वे कर सकते हैं, जो पारिवारिक कर्तव्य हैं जो कि वर्णाश्रम का एक अंग है उन्हें आप संपन्न कर सकते हैं अथवा अन्य कोई कार्य कर सकते हैं परंतु आपके इन सभी कार्यों के लिए 2 घंटे हैं ही नहीं यह 2 घंटे केवल और केवल आपके जप के लिए हैं। इस प्रकार से 2 घंटे आप जप कीजिए और इस प्रकार अन्य 22 घंटे है उसमें और अधिक जप कर सकते हैं, आप श्रवण कर सकते हैं, आप सेवाएं कर सकते हैं। आपके जो कर्तव्य हैं आप उन्हें पूरा कर सकते हैं, उनका पालन कर सकते हैं। हमने यहाँ अलाचवा अमेरिका में कल बलराम पूर्णिमा मनाई थी और भारत में आज सभी बलराम पूर्णिमा मना रहे होंगे। इस प्रकार जब हमने बलराम पूर्णिमा का महोत्सव कल मनाया था अलाचवा मे तो हमने पूरे दिन बलराम जी का स्मरण किया उनके विषय में चिंतन करते रहे और उनके लिए कीर्तन किया और बलराम जी की कथा करके उनका स्मरण किया। हमने हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।। इस मंत्र का अधिक से अधिक मात्रा में कल कीर्तन किया और विशंभर प्रभु ने भी कीर्तन किया। बलराम जी आदि गुरु हैं, वे प्रथम अध्यात्मिक गुरु हैं और जब हम हरे कृष्ण महामंत्र का जप करते हैं उसमें जो हरे राम आता है तो उसमें श्रील प्रभुपाद एक समय बताते हैं की यह जो हरे राम है उसमें वह राम बलराम ही हैं। भारत में कुछ व्यक्ति जानना चाह रहे थे कि हम हरे राम कहते हैं महामंत्र में, क्या यह जय श्रीराम वाले राम है दशरथ पुत्र राम है। प्रभुपाद ने उन्हें कहा हां वे वो ही राम हैं। प्रभुपाद यह भी कहते हैं, हरे कृष्ण में जो राम हैं वह बलराम है और हम सभी जैसा कि जानते हैं कि जब हम हरे राम कहते हैं वे श्री कृष्ण ही हैं। इस प्रकार से कृष्ण ही बलराम हैं, हरे राम बलराम भी हैं और कृष्ण भी हैं, कृष्ण बलराम एक ही हैं। प्रभुपाद जी भी ऐसा कहते हैं हमने भी कल ऐसा बताया था बलराम जो 98% भगवान है वह लगभग कृष्ण ही हैं। वे कृष्ण के अत्यंत समीप है केवल कुछ 2% ही कमी है कि वे कृष्ण नहीं हैं। परंतु वह लगभग वही है इस प्रकार से हरे कृष्ण महामंत्र का जप करने वाले साधक जो हरे राम कहते हैं उन्हें आज बलराम का स्मरण होना चाहिए। उनका नाम ही है बलराम अर्थात बल और राम, बल का अर्थ है शक्ति वह जो हमें आध्यात्मिक बल प्रदान करते हैं। वह बलराम है जैसा कि कहते हैं( नायम आत्मा ना बलहीने ना लभय) अर्थात आत्मा का अनुभव हमें नहीं हो सकता है, हमें कृष्ण साक्षात्कार अथवा भागवत साक्षात्कार नहीं हो सकता है जब तक हमारे पास में वह बल नहीं है (बल ही ना लभय) अर्थात जिसके पास आध्यात्मिक बल नहीं है ना लभय है उसे यह प्राप्त नहीं हो सकता है। इस प्रकार से बलराम हमें आध्यात्मिक शक्ति अथवा आध्यात्मिक बल प्रदान करते हैं । इस प्रकार से बलराम जी आदि गुरु हैं और यह जो शक्ति है उसके स्त्रोत भी बलराम ही हैं। जो हमारे आध्यात्मिक गुरु हैं वे बलराम के प्रतिनिधि हैं और यह जो शक्ति और अध्यात्मिक बल है वह बल बलराम जी द्वारा हमारे आध्यात्मिक गुरु के पास और उनके माध्यम से हम तक आता है। और हमें भी आध्यात्मिक बल अथवा आनंद की प्राप्ति होती है। इस प्रकार कहते हैं (रमन्ति रमयन्ती इति राम:) रमन्ति अर्थात जो आनंद प्रदान करते हैं जो स्वयं आनंद प्राप्त करते हैं रमयंती जो अन्यों को आनंद देते हैं और च अर्थात भी जों स्वयं भी आनंद प्राप्त करते हैं, वे राम हैं। इस प्रकार से बलराम स्वयं यह आनंद प्राप्त करते हैं और हमें भी आनंद प्रदान करते हैं जैसा कि कहा जाता है कि( हा हा प्रभु नित्यानंद प्रेमानंद सुखी) यह प्रसिद्ध पंक्ति है भजन की इसमें कहते हैं नित्यानंद प्रभु आप तो अत्यंत सुखी हैं, आप अत्यंत प्रसन्न है, आप सदैव इस प्रेम आनंद में निमग्न रहते हैं। तो यहां पर नित्यानंद को संबोधित करके यह कहा गया है नित्यानंद प्रभु और बलराम यह दोनों एक ही है और यह हमेशा प्रेमानंद में आनंदित रहते हैं। आनंद में सुखी रहते हैं "बलराम होइलो निताई" हम चाहे निताई कहे या बलराम यहां पर उसमें कोई भेद नहीं है इस प्रकार से निताई अथवा बलराम सदैव आनंदित रहते हैं परंतु आगे वे कहते हैं (आमी बडो दुखी) परंतु आप मेरी तरफ देखिए मैं तो अत्यंत दुखी हूं आप सदैव सुखी रहते हैं और मैं सदैव दुखी हूं यह ठीक नहीं है।अतः हे नित्यानंद हे बलराम कृपया कुछ ऐसा कीजिए कि मैं भी सुखी रह सकूं मुझे भी इस प्रेम आनंद की प्राप्ति हो सके। जो भी भक्त यह भजन करते हैं अथवा इसके विषय में जानते हैं उन्हें यह सोचना चाहिए, नित्यानंद अथवा बलराम वे सदैव सुखी हैं और हम सदैव दुखी हैं और हम यह प्रार्थना करते हैं इस भजन के माध्यम से कि हमें भी प्रेमानंद का कुछ अंश प्राप्त हो जिससे हम सुखी हो सकें। इस प्रकार जब हम हरे कृष्ण महामंत्र का जप करते हैं यह हरे कृष्ण महामंत्र का जप कृष्ण और बलराम के लिए हमारे द्वारा की गई प्रार्थना है। इससे हम प्रसन्न हो सकते हैं जब कोई हरे कृष्ण महामंत्र जप करता है वह प्रसन्न हो सकता है, इसके अलावा और कोई माध्यम नहीं है जिससे हम प्रसन्न रह सकते हैं (हरेर्नामेव केवलम) केवल यही एक मार्ग है जो हमें प्रसन्न कर सकता है। कल हम बलराम जी का आविर्भाव दिवस मना रहे थे और यहां पर भी दो जीवात्माओं ने कल दीक्षा ग्रहण की उन्होंने वास्तव में( जीव जागो जीव जागो गोरा चांद बोले) अर्थात हे जीव अब तुम उठो चैतन्य महाप्रभु ऐसा आह्वान कर रहे हैं। हमें बुला रहे हैं वास्तव में गौरांग महाप्रभु प्रत्येक समय हमें बुलाते हैं की हे जीव अब तुम उठो परंतु हम कभी यह सुनते हैं, कभी नहीं सुनते हैं, अथवा कभी हम सुन भी लेते हैं। इसके विषय में हम सोचते नहीं हैं, कुछ चिंतन नहीं करते हैं। परंतु कल दो जीवात्माओं ने वास्तव में सुना कि चैतन्य महाप्रभु कह रहे हैं, हे जीव जागो हे जीव जागो और कल उन्होंने दीक्षा प्राप्त की साक्षी गोपाल प्रभु जी का बड़ा बेटा है जो की उम्र में ज्यादा बड़ा नहीं है मात्र 13 वर्ष का है, उन्होंने कल दीक्षा ली और उनका जो दीक्षित नाम हुआ गोरा चांद प्रभु तो गोराचंद प्रभु ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए अथवा कहे तो मैंने उनके लिए सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये और मैंने मात्र 13 वर्ष की उम्र के बच्चे को दीक्षा दी अभी वह मेरे सभी शिष्यों में सबसे छोटे शिष्य हैं, जिनकी उम्र 13 वर्ष है। कल सभी उनकी प्रशंसा कर रहे थे यहां जो मंदिर अध्यक्ष है मुख्या माताजी वह भी उनकी प्रशंसा कर रही थी गोरा चांद प्रभु के साथ ही साथ एक भक्त है जो कि 22 वर्ष की हैं उन्होंने भी कल दीक्षा ली उनका दीक्षित नाम है रस आनंदी राधा। रस आनंदी राधा माताजी जो गुहयाना से है पर वह अब काफी समय से अलाचवा में रहती हैं और यह धर्मराज प्रभु की बेटी है कल इन 2 जीवात्माओं ने बलराम पूर्णिमा के दिन यहां पर दीक्षा ग्रहण की इस प्रकार से इन दो भक्तों ने यहां पर दीक्षा ली। दीक्षा को अंग्रेजी में इनीशिएशन जैसा कि कहा जाता है इनीशिएशन अर्थात कल इनीशिएटिव लिया है इन्होंने यहां कल पहल की है। इन्होंने यहां दीक्षा ली यहां जो मंदिर अध्यक्ष है मुख्या माताजी वह बता रही थी कि आज इन 2 जीवात्माओ ने यह शपथ ली है कि अब हम प्रतिदिन 16 माला करेंगे। जब यह दीक्षा हो रही थी जब यह समारोह चल रहा था उस समय गोरा चांद प्रभु के जो गुरुकुल के मित्र थे वे इसके साक्षी थे और रस आनंदी माताजी के ग्रुप के सदस्य वे भी इसके साक्षी थे। विशंभर प्रभु इसके साक्षी थे तुलसी इसकी साक्षी थी और हमारे हार्दिक पटेल हैं जो नियमित इस कॉन्फ्रेंस में हमारे साथ जप करते हैं, वे 8 घंटे की लंबी ड्राइव करके यहां पर आए और वह भी इसके साक्षी रहे। इसके साथ ही साथ मॉरीशस के भक्त भी साक्षी है, विद्या माताजी है जो कनाडा टोरंटो में रहती है वह भी बहुत लंबी हवाई यात्रा करके यहां पर आई और वह भी इसकी साक्षी रही। इस प्रकार से इन दो भक्तों ने कल दीक्षा प्राप्त की, उन्होंने अन्य के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है और अब उन्हें अन्य को भी यह बताना चाहिए आप सभी ने अब 16 माला करने का यह नियम लिया है। आपका जप गुणवत्ता पूर्वक क्वांटिटी और क्वालिटी वाइज दोनों होने चाहिए। गुणवत्ता पूर्वक, ध्यानपूर्वक अच्छी प्रकार से हो, जब मैं क्वालिटी वाइज कहता हूं ऐसा नहीं आप कहे ठीक है मैं 4 माला करूंगा और यह चार माला मैं ध्यान पूर्वक करूंगा, ऐसा नहीं कम से कम आप को 16 माला करनी है। आपके लिए अब प्रत्येक दिन में से जो 2 घंटे हैं वह कृष्ण के लिए हैं उस समय केवल हरे कृष्ण महामंत्र का जप करेंगे। इस प्रकार से ध्यानपूर्वक जप करने का अर्थ है स्वयं की देखभाल करना, आप इस प्रकार से खुद की देखभाल करते हैं आपने स्वयं को समझ लिया है, जो वास्तव में सेल्फ है वह कौन है वह हमारी आत्मा है और जो आत्मा है वह हम खुद हैं परंतु हम बहुत लंबे समय से इसे इग्नोर कर रहे थे , और इस प्रकार से जीव जागो जीव जागो के माध्यम से हम कहते हैं, हे जीव अब तुम जागो यहां हम शरीर को संबोधित नहीं करते हैं, शरीर तो जग जाता है। जब हम भूखे हैं या जब हमें ऑफिस जाना होता है उस समय शरीर तो उठता है परंतु आत्मा उस समय भी सोई रहती है। परंतु इस प्रकार से हम यह जो भजन जीव जागो जीव जागो इसके माध्यम से हम आत्मा को संबोधित करते हैं और उसे जगाते हैं। हरे कृष्ण

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